डिलीवरी डेट कैलकुलेटर , पीरियड कैलकुलेटर आपकी आखिरी पीरियड की तारीख में आपके औसत साइकिल लेंथ (आमतौर पर 28 दिन) को जोड़कर अगली संभावित पीरियड डेट बताता है। यह साथ ही आपकी फर्टाइल विंडो और ओव्यूलेशन का अनुमानित समय भी बताता है।
डिलीवरी डेट कैलकुलेटर: अपनी संभावित डिलीवरी की तारीख 2 मिनट में जानें
जब प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो सबसे पहला सवाल जो हर महिला के मन में आता है — “मेरी डिलीवरी कब होगी?” यह सवाल सिर्फ उत्सुकता का नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी होती है डॉक्टर की अपॉइंटमेंट्स की प्लानिंग, ऑफिस से मैटरनिटी लीव की तैयारी, और परिवार में आने वाली खुशी का इंतजार।
अच्छी खबर यह है कि आपकी संभावित डिलीवरी डेट (Due Date) पता करना बहुत आसान है — और इसके लिए आपको सिर्फ एक जानकारी चाहिए: आपकी आखिरी माहवारी (Last Menstrual Period / LMP) की तारीख।
नीचे दिए गए कैलकुलेटर में अपनी LMP डेट डालें और तुरंत अपनी संभावित डिलीवरी डेट जानें। इसके बाद, इस आर्टिकल में हम विस्तार से समझेंगे कि यह डेट कैसे निकलती है, कब बदल सकती है, और इर्रेगुलर पीरियड वाली महिलाओं के लिए क्या तरीका है।
अब बढ़ते हैं इस टॉपिक की गहराई में — ताकि आप सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि पूरी समझ लेकर जाएं। डिलीवरी डेट कैलकुलेटर
डिलीवरी डेट कैसे कैलकुलेट होती है
डिलीवरी डेट निकालने का सबसे पुराना और आज भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है Naegele’s Rule। यह एक जर्मन डॉक्टर फ्रांज़ नेगेले के नाम पर रखा गया फॉर्मूला है, जो 200 साल से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है।
फॉर्मूला बहुत सीधा है:
आपकी आखिरी माहवारी की पहली तारीख में 280 दिन (यानी 40 हफ्ते) जोड़ दिए जाते हैं। यही तारीख आपकी संभावित डिलीवरी डेट मानी जाती है।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए रीना की आखिरी माहवारी 10 जनवरी को शुरू हुई थी। इसमें 280 दिन जोड़ने पर संभावित डिलीवरी डेट आती है 17 अक्टूबर के आसपास।
(यह सिर्फ एक उदाहरण है, वास्तविक व्यक्ति नहीं) डिलीवरी डेट कैलकुलेटर
यह गणना इस मान्यता पर आधारित है कि महिला का साइकिल 28 दिन का है और ओव्यूलेशन साइकिल के 14वें दिन होता है। लेकिन हकीकत में हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए यह डेट एक अनुमान है, गारंटी नहीं।
LMP क्या है और यह क्यों जरूरी है
LMP यानी Last Menstrual Period — आपकी आखिरी माहवारी की पहली तारीख। डॉक्टर प्रेगनेंसी की उम्र (gestational age) इसी तारीख से गिनना शुरू करते हैं, न कि उस दिन से जब गर्भधारण हुआ हो।
यह थोड़ा confusing लग सकता है:
“अगर गर्भधारण बाद में हुआ, तो प्रेगनेंसी की गिनती पहले से क्यों शुरू होती है?”
इसका जवाब सीधा है — गर्भधारण की सटीक तारीख पता करना मुश्किल है, लेकिन LMP की तारीख याद रखना आसान है। इसलिए मेडिकल जगत में यही स्टैंडर्ड तरीका बन गया।
इसीलिए जब डॉक्टर कहते हैं “आप 8 हफ्ते की प्रेगनेंट हैं”, तो असल गर्भधारण को हुए सिर्फ लगभग 6 हफ्ते ही हुए होते हैं — क्योंकि गिनती LMP से शुरू होती है, ओव्यूलेशन से नहीं।
इर्रेगुलर पीरियड में डेट कैसे निकालें
अगर आपका मासिक चक्र (menstrual cycle) नियमित 28 दिन का नहीं है — यह बहुत सी महिलाओं के लिए सामान्य बात है — तो सिर्फ LMP + 280 दिन वाला फॉर्मूला उतना सटीक नहीं रहता।
ऐसे में यह तरीके मदद कर सकते हैं:
- साइकिल लेंथ एडजस्टमेंट: अगर आपका साइकिल 28 दिन से लंबा या छोटा है, तो उस अंतर को due date में जोड़ें या घटाएं
- अल्ट्रासाउंड डेटिंग: पहली तिमाही में किया गया अल्ट्रासाउंड LMP से ज्यादा सटीक माना जाता है, खासकर इर्रेगुलर पीरियड वालों के लिए
- डॉक्टर की सलाह: अगर पीरियड बहुत इर्रेगुलर है (PCOS जैसी स्थिति में), तो शुरुआती अल्ट्रासाउंड ही सबसे भरोसेमंद तरीका है
अल्ट्रासाउंड डेट बनाम LMP डेट
यह एक आम सवाल है — “मेरी LMP डेट और अल्ट्रासाउंड डेट अलग-अलग क्यों आ रही हैं?”
| पहलू | LMP आधारित डेट | अल्ट्रासाउंड आधारित डेट |
|---|---|---|
| कब भरोसेमंद | नियमित 28-दिन साइकिल में | हमेशा, खासकर पहली तिमाही में |
| सटीकता | +/- 1-2 हफ्ते | +/- 3-7 दिन (पहली तिमाही में) |
| इर्रेगुलर साइकिल में | कम भरोसेमंद | ज्यादा भरोसेमंद |
| कब इस्तेमाल होता है | शुरुआती अनुमान के लिए | कन्फर्मेशन और सटीक डेटिंग के लिए |
सामान्य नियम: अगर LMP डेट और अल्ट्रासाउंड डेट में 7 दिन से ज्यादा का फर्क आए, तो डॉक्टर आमतौर पर अल्ट्रासाउंड डेट को ही सही मानते हैं।
ट्राइमेस्टर के हिसाब से हफ्ते समझना
पूरी प्रेगनेंसी को तीन हिस्सों (ट्राइमेस्टर) में बांटा जाता है:
| ट्राइमेस्टर | हफ्ते | महीने (लगभग) |
|---|---|---|
| पहला ट्राइमेस्टर | 1 से 13 हफ्ते | 1 से 3 महीने |
| दूसरा ट्राइमेस्टर | 14 से 27 हफ्ते | 4 से 6 महीने |
| तीसरा ट्राइमेस्टर | 28 से 40 हफ्ते | 7 से 9 महीने |
“37 सप्ताह का मतलब कितने महीने?” — यह एक बहुत पूछा जाने वाला सवाल है। 37 हफ्ते लगभग 8 महीने और 2-3 हफ्ते के बराबर होते हैं। ध्यान रहे, हफ्तों को महीनों में बदलना पूरी तरह सटीक नहीं होता क्योंकि महीनों की लंबाई अलग-अलग होती है — इसीलिए डॉक्टर हमेशा हफ्तों में बात करना पसंद करते हैं।
37 हफ्ते के बाद बच्चे को “फुल टर्म” माना जाता है, यानी अब डिलीवरी किसी भी दिन हो सकती है।
डिलीवरी डेट क्यों बदल सकती है
बहुत सी महिलाओं को यह सुनकर हैरानी होती है कि जो due date डॉक्टर ने शुरुआत में बताई थी, वह बाद में बदल जाती है। यह पूरी तरह सामान्य है और इसकी वजहें समझना जरूरी है।
डिलीवरी डेट बदलने के मुख्य कारण:
- शुरुआती अल्ट्रासाउंड की तुलना में बाद के अल्ट्रासाउंड से ज्यादा सटीक जानकारी मिलना
- LMP की तारीख ठीक से याद न होना
- साइकिल इर्रेगुलर होना, जिससे शुरुआती अनुमान गलत निकलना
- बच्चे की ग्रोथ पैटर्न में सामान्य अंतर
जरूरी बात: सिर्फ 5% महिलाओं की डिलीवरी ठीक उसी due date पर होती है जो शुरुआत में बताई गई थी। ज्यादातर डिलीवरी due date के 2 हफ्ते पहले से 2 हफ्ते बाद के बीच होती है — यह पूरी तरह सामान्य रेंज है।
मिथक बनाम सच्चाई
| मिथक | सच्चाई |
|---|---|
| Due date पर ही डिलीवरी होनी चाहिए | सिर्फ 5% महिलाओं की डिलीवरी exact due date पर होती है |
| पहली प्रेगनेंसी हमेशा late होती है | यह हर महिला के शरीर पर निर्भर करता है, कोई पक्का नियम नहीं |
| Ultrasound हमेशा 100% सटीक होता है | पहली तिमाही में ज्यादा सटीक होता है, बाद में अनुमान थोड़ा कम सटीक हो सकता है |
| Due date के बाद डिलीवरी न हो तो कुछ गलत है | 40-42 हफ्ते तक इंतजार करना सामान्य माना जाता है, डॉक्टर मॉनिटर करते हैं |
| महीनों में हफ्ते बदलना आसान गणित है | महीनों की लंबाई अलग होने से यह गणना उलझन भरी हो सकती है, इसलिए हफ्तों में सोचना बेहतर है |
आम गलतियां जो महिलाएं करती हैं
- LMP की तारीख ठीक से नोट न करना — शुरुआत में ही तारीख याद रखना या लिख लेना मुश्किलें कम करता है
- सिर्फ ऑनलाइन कैलकुलेटर पर निर्भर रहना — कैलकुलेटर एक अच्छा शुरुआती अनुमान देता है, लेकिन डॉक्टर की जांच जरूरी है
- Due date को fixed डेडलाइन समझना — इससे गैरजरूरी तनाव बढ़ता है
- इर्रेगुलर पीरियड होने पर भी standard फॉर्मूला इस्तेमाल करना — ऐसे में शुरुआती अल्ट्रासाउंड ज्यादा भरोसेमंद है
डॉक्टर से कब मिलें
- जैसे ही प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आए, पहली अपॉइंटमेंट बुक करें (आमतौर पर 6-8 हफ्ते के आसपास)
- अगर पीरियड इर्रेगुलर है, तो जल्द से जल्द डेटिंग अल्ट्रासाउंड की सलाह लें
- अगर due date के बाद 1-2 हफ्ते तक कोई लक्षण न दिखें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें
- पेट में तेज दर्द, ब्लीडिंग, या असामान्य लक्षण होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें

एक्सपर्ट टिप्स
टिप 1: अपनी LMP की तारीख फोन में या डायरी में नोट कर लें — यह जानकारी हर डॉक्टर विजिट में काम आएगी।
टिप 2: Due date को एक “अनुमानित रेंज” की तरह देखें (जैसे 38-42 हफ्ते), फिक्स डेट की तरह नहीं — इससे मानसिक तनाव कम होता है।
टिप 3: अगर कैलकुलेटर और डॉक्टर की बताई डेट में फर्क है, तो हमेशा डॉक्टर की बताई डेट को प्राथमिकता दें, क्योंकि वह अल्ट्रासाउंड और जांच पर आधारित होती है।
चेकलिस्ट: due date पता चलने के बाद क्या करें
- LMP की तारीख डॉक्टर को बताएं और कन्फर्म करें
- पहली तिमाही में डेटिंग अल्ट्रासाउंड करवाएं
- Antenatal (प्रसवपूर्व) चेकअप का शेड्यूल बनाएं
- Due date के आसपास मैटरनिटी लीव की प्लानिंग शुरू करें
- अस्पताल/डिलीवरी की जगह पहले से तय करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. डिलीवरी की तारीख कैसे पता करें? आखिरी माहवारी (LMP) की तारीख में 280 दिन जोड़कर संभावित डिलीवरी डेट पता की जाती है। इसके अलावा पहली तिमाही का अल्ट्रासाउंड भी सटीक जानकारी देता है।
2. 9 महीने पूरे होने के कितने दिन बाद डिलीवरी होती है? सामान्य प्रेगनेंसी लगभग 40 हफ्ते (280 दिन) की होती है, जो लगभग 9 महीने के बराबर है। डिलीवरी इस तारीख के 2 हफ्ते आगे-पीछे भी हो सकती है।
3. 37 सप्ताह का मतलब कितने महीने होता है? 37 हफ्ते लगभग 8 महीने और 2-3 हफ्ते के बराबर होते हैं। इस हफ्ते के बाद बच्चे को “फुल टर्म” माना जाता है।
4. प्रेगनेंसी की डेट कब से गिनी जाती है? प्रेगनेंसी की गिनती आखिरी माहवारी (LMP) की पहली तारीख से शुरू होती है, न कि गर्भधारण की तारीख से।
5. इर्रेगुलर पीरियड में डिलीवरी डेट कैसे पता करें? ऐसे में सिर्फ LMP आधारित फॉर्मूला कम सटीक होता है। पहली तिमाही में करवाया गया अल्ट्रासाउंड ज्यादा भरोसेमंद डेट देता है।
6. अल्ट्रासाउंड से डिलीवरी डेट कितनी सही आती है? पहली तिमाही में किया गया अल्ट्रासाउंड सबसे सटीक माना जाता है, आमतौर पर 3-7 दिन के अंतर के साथ।
7. डिलीवरी डेट आगे-पीछे क्यों होती है? हर महिला के शरीर की प्रक्रिया अलग होती है। बच्चे की ग्रोथ, मां की सेहत, और साइकिल की लंबाई जैसे कारक डेट को प्रभावित करते हैं।
8. डिलीवरी डेट के बाद डिलीवरी न हो तो क्या करें? 40-42 हफ्ते तक इंतजार करना सामान्य है, लेकिन डॉक्टर इस दौरान बच्चे की सेहत पर नजर रखते हैं। समय पर चेकअप कराते रहें।
निष्कर्ष – डिलीवरी डेट कैलकुलेटर
डिलीवरी डेट जानना हर गर्भवती महिला और उसके परिवार के लिए एक भावनात्मक और जरूरी पल होता है। जैसा हमने इस आर्टिकल में समझा, यह तारीख Naegele’s Rule (LMP + 280 दिन) के आधार पर निकाली जाती है, लेकिन यह एक अनुमान है — पक्की गारंटी नहीं।
चाहे आपका साइकिल नियमित हो या इर्रेगुलर, सबसे भरोसेमंद जानकारी हमेशा आपके डॉक्टर और अल्ट्रासाउंड जांच से ही मिलेगी। ऊपर दिया गया कैलकुलेटर आपको एक शुरुआती अंदाजा देने के लिए है, ताकि आप मानसिक रूप से और प्लानिंग के लिहाज से तैयार रह सकें।
याद रखें — due date एक तारीख नहीं, एक रेंज है। अपनी प्रेगनेंसी जर्नी को तनाव में नहीं, बल्कि खुशी और तैयारी के साथ जिएं।
Call To Action – डिलीवरी डेट कैलकुलेटर
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डिस्क्लेमर
यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और यह मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी प्रेगनेंसी से जुड़े किसी भी फैसले के लिए हमेशा एक क्वालिफाइड डॉक्टर या स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।
नोट: इस सेक्शन को Part 2 के “ट्राइमेस्टर के हिसाब से हफ्ते समझना” के बाद और Part 3 के “डिलीवरी डेट क्यों बदल सकती है” से पहले जोड़ें।
EDD (Estimated Due Date) क्या है
जब आप डॉक्टर के पास जाती हैं या कोई प्रेगनेंसी ऐप इस्तेमाल करती हैं, तो अक्सर EDD शब्द सुनने को मिलता है। EDD का मतलब है Estimated Due Date — यानी अनुमानित डिलीवरी तारीख।
यह वही तारीख है जो LMP + 280 दिन के फॉर्मूले से, या अल्ट्रासाउंड जांच से निकाली जाती है। मेडिकल रिपोर्ट्स और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में अक्सर “EDD” शब्द ही इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका मतलब समझना जरूरी है।
याद रखने वाली बात: EDD कोई फिक्स तारीख नहीं, बल्कि एक अनुमान है — जैसा हमने ऊपर भी समझा।
प्रेगनेंसी के हफ्ते कैसे गिनें
प्रेगनेंसी को हफ्तों में गिनना डॉक्टरों का सबसे भरोसेमंद तरीका है, क्योंकि यह महीनों से ज्यादा सटीक होता है। हफ्ते गिनने का तरीका बहुत आसान है:
- अपनी LMP की तारीख से आज की तारीख तक के दिन गिनें
- उन दिनों को 7 से भाग दें
- जो जवाब आए, वह आपके प्रेगनेंसी के पूरे हफ्ते हैं
उदाहरण: अगर LMP से आज तक 98 दिन बीत चुके हैं, तो 98 ÷ 7 = 14 — यानी आप 14 हफ्ते की प्रेगनेंट हैं।
ऊपर दिया गया कैलकुलेटर आपके लिए यह गिनती अपने आप कर देता है, इसलिए आपको मैन्युअली गिनने की जरूरत नहीं पड़ती।
प्रेगनेंसी के महीने कैसे गिनें
महीनों में गिनना हफ्तों जितना सटीक नहीं होता, क्योंकि हर महीने में दिनों की संख्या अलग होती है (28, 30, या 31 दिन)। फिर भी, आम बोलचाल में लोग महीनों में बात करना पसंद करते हैं, इसलिए एक सामान्य अंदाजा यहां दिया गया है:
| हफ्ते | महीना (लगभग) |
|---|---|
| 1-4 हफ्ते | पहला महीना |
| 5-8 हफ्ते | दूसरा महीना |
| 9-13 हफ्ते | तीसरा महीना |
| 14-17 हफ्ते | चौथा महीना |
| 18-22 हफ्ते | पांचवां महीना |
| 23-27 हफ्ते | छठा महीना |
| 28-31 हफ्ते | सातवां महीना |
| 32-35 हफ्ते | आठवां महीना |
| 36-40 हफ्ते | नौवां महीना |
सलाह: डॉक्टर से बात करते समय हमेशा हफ्तों में जानकारी दें और लें — यह ज्यादा सटीक और स्टैंडर्ड तरीका है।
प्रेगनेंसी डेट कैलकुलेटर ऐप बनाम वेबसाइट कैलकुलेटर
बहुत से लोग पूछते हैं कि प्रेगनेंसी डेट निकालने के लिए मोबाइल ऐप डाउनलोड करें या वेबसाइट कैलकुलेटर इस्तेमाल करें। दोनों एक ही फॉर्मूले (LMP + 280 दिन) पर काम करते हैं, इसलिए नतीजा एक जैसा ही आता है।
वेबसाइट कैलकुलेटर के फायदे:
- कोई डाउनलोड या स्टोरेज स्पेस नहीं चाहिए
- तुरंत इस्तेमाल कर सकते हैं, बिना अकाउंट बनाए
- साथ ही पूरी जानकारी (जैसे यह आर्टिकल) भी एक ही जगह मिल जाती है
अगर आप बार-बार अपनी प्रेगनेंसी ट्रैक करना चाहती हैं, तो इस पेज को बुकमार्क कर लें — जब चाहें दोबारा इस्तेमाल कर सकती हैं।

नॉर्मल डिलीवरी किस हफ्ते में होती है
यह एक बहुत आम सवाल है, खासकर जैसे-जैसे due date पास आती है। आमतौर पर डॉक्टर प्रेगनेंसी को इन हिस्सों में बांटकर समझाते हैं:
| समय | स्थिति |
|---|---|
| 37 हफ्ते से पहले | Preterm (समय से पहले) — बच्चे को अतिरिक्त मेडिकल केयर की जरूरत हो सकती है |
| 37 से 38 हफ्ते | Early Term |
| 39 से 40 हफ्ते | Full Term (सबसे सामान्य और सुरक्षित माना जाने वाला समय) |
| 41 हफ्ते | Late Term |
| 42 हफ्ते के बाद | Post Term — डॉक्टर आमतौर पर इससे पहले डिलीवरी की सलाह देते हैं |
नॉर्मल (vaginal) डिलीवरी सबसे ज्यादा 39 से 41 हफ्ते के बीच होती है। हालांकि, अगर डॉक्टर को कोई मेडिकल कारण दिखे (जैसे बच्चे की पोजीशन, मां की सेहत, या अन्य जटिलताएं), तो वह पहले भी डिलीवरी की सलाह दे सकते हैं। हर प्रेगनेंसी अलग होती है, इसलिए यह जानकारी सिर्फ सामान्य अंदाजे के लिए है — अंतिम फैसला हमेशा डॉक्टर की जांच पर निर्भर करता है।
पहली प्रेगनेंसी में डिलीवरी डेट कैसे बदलती है
एक आम धारणा है कि “पहली प्रेगनेंसी हमेशा late होती है” — लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। हालांकि, कुछ रिसर्च और डॉक्टरों के अनुभव के आधार पर यह जरूर देखा गया है कि:
- पहली बार मां बनने वाली महिलाओं में डिलीवरी due date के आसपास या थोड़ा बाद होने की संभावना थोड़ी ज्यादा हो सकती है, दूसरी या तीसरी प्रेगनेंसी की तुलना में
- दूसरी और उसके बाद की प्रेगनेंसी में शरीर पहले से “अनुभवी” होता है, जिससे लेबर प्रोसेस अक्सर तेज या समय पर शुरू हो सकता है
- लेकिन यह कोई पक्का नियम नहीं है — बहुत सी पहली बार मां बनने वाली महिलाओं की डिलीवरी भी exact due date पर या उससे पहले होती है
मुख्य बात यह है: पहली प्रेगनेंसी हो या दूसरी, due date सिर्फ एक अनुमानित रेंज है, फिक्स तारीख नहीं। जितना जरूरी सही तारीख जानना है, उतना ही जरूरी है इस बात को स्वीकार करना कि शरीर की अपनी टाइमिंग होती है, जो हर महिला में अलग हो सकती है।
क्या डिलीवरी डेट से बच्चे का लिंग (बॉय या गर्ल) पता चलता है
यह एक बहुत पूछा जाने वाला सवाल है, लेकिन जरूरी है कि इसे साफ-साफ समझा जाए: डिलीवरी डेट कैलकुलेटर का बच्चे के लिंग (लड़का या लड़की) से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है।
due date सिर्फ LMP और साइकिल पर आधारित होती है, जबकि बच्चे का लिंग गर्भधारण के समय क्रोमोसोम से तय होता है। इंटरनेट पर मिलने वाले “चीनी जन्म कैलेंडर” जैसे लिंग-अनुमान टूल्स सिर्फ मनोरंजन के लिए होते हैं, इनकी कोई मेडिकल वैलिडिटी नहीं है।
बच्चे का लिंग सटीक जानने का एकमात्र भरोसेमंद तरीका है अल्ट्रासाउंड (आमतौर पर 18-20 हफ्ते के आसपास) या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई मेडिकल जांच।
डिलीवरी डेट कैलकुलेटर
अन्य उपयोगी कैलकुलेटर
External: nhp.gov.in — pregnancy food guide। Support: iCall — 9152987821
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